[सावधान और समाधान]

मनीषा, रोहित, समीर, पूजा और मयंक सभी एक रूम में बैठकर अपनी अपनी बात को लेकर परेशान थे और उन कहानियों को शेयर कर रहे थे जिन कहानियों में सच्चाई है और आजकल स्कैम के तौर पर ज्यादा चल रहा है जिसको फ्रॉड भी बोला जाता है |उसमें से एक कहानी है आदि नामक बच्चे की|

मनीषा सबको कहानी बता रही होती है-

आदि जिसका पूरा नाम आदित्य (बदला हुआ नाम) है जो उत्तर प्रदेश का निवासी है | एक मीडियम परिवार से आता है जो b.a. फाइनल ईयर हो जाने के बाद यूपीएससी की तैयारी में जुटा है और यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में जाकर रात और दिन एक करके यूपीएससी की तैयारी करने में पूरी मेहनत और लगन के साथ लगा हुआ है |

लेकिन उसको क्या पता था कि उसकी लाइफ एक अलग मोड़ पर खड़ी होने वाली है इसका उसको कुछ भी अंदाजा नहीं था |

हुआ यूं कि, आदि हर रोज अपने गांव से बस द्वारा  निकलता और बस स्टैंड से यूनिवर्सिटी तक 5 से 6 किलोमीटर की दूरी तय करके पैदल जाता और लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ता |  वहीं लाइब्रेरी में एक जितेंद्र नाम का लड़का उसको मिलता है जिस लड़के से आदित्य बिल्कुल भी अनजान है | वह लड़का आदित्य से कहता है आदि भाई मैं आपको रोज गांव से बस द्वारा आते हो और बस स्टैंड से यूनिवर्सिटी तक पैदल आते हुए देखता हूं | मैं आपके दोस्त गौरव का दोस्त हूं आपके दोस्त ने आपके बारे में सब बताया है और आज मैं आपसे मिलने आ ही गया अच्छा तो मैं यह कह रहा था कि आदित्य भाई  आप एक बाइक ले लो | मैं आपको एक अच्छी और सस्ती बाइक दिलवा दूंगा|

आदि कहता है भाई मेरी अभी बाइक लेने की हैसियत नहीं है |  अगर है भी, तो मुझे अभी कोई जरूरत नहीं लग रही है | मैं एक छात्र होने के साथ-साथ यूनिवर्सिटी की रेसलिंग का भी हिस्सा हूं और मुझे मेहनत करनी चाहिए जो मैं मेहनत करता हूं | मेरी  मेहनत बाइक लेने से और  गांव से बाइक द्वारा लाइब्रेरी तक आने से शायद फीकी पड़ जाएगी इसलिए मुझे कोई जरूरत नहीं है अभी |

लेकिन उसको क्या पता था उसके साथ कुछ और ही होने वाला था |

अब जितेंद्र ने रोज उसी समय पर आदि से हर रोज बार-बार मिलने लगा | अच्छी जान पहचान भी हो गई सिर्फ एक नाम के तौर पर दोनों लगभग 10-15 मिनट डेली बात करते परंतु जितेंद्र  हर रोज एक ही बात आदित्य से बार-बार दोहराता | भाई बाइक ले लो.,

आदित्य हर रोज एक ही बात बोलता, मुझे अभी कोई जरूरत नहीं है और मेरी स्कॉलरशिप आने वाली है तब देखता हूं अगर मुझे जरूरत महसूस होगी तो मैं ले लूंगा|

फिर एक दिन अचानक जितेंद्र रोता हुआ आया|  उसके हाथ में कुछ पेपर थे जो गाड़ी के पेपर थे| बोलता है यह गाड़ी की आरसी ,आधार कार्ड और  पैन कार्ड हैं| यह मेरे बड़े भाई के नाम गाड़ी है | मेरी मां दिल्ली के बड़े हॉस्पिटल एम्स में भर्ती है | कृपया करके भाई मेरी मदद करिए आपको गाड़ी की जरूरत है और मुझे पैसों की |

आदि ने बहुत मना किया | नहीं भाई मुझे गाड़ी नहीं चाहिए | तुझे पैसे चाहिए मैं पैसे देता हूं मेरी स्कॉलरशिप आ चुकी है और ग्रेजुएशन की तीनों सालों की स्कॉलरशिप मेरे अकाउंट में अभी तक सुरक्षित है| पैसे  ले ले लेकिन मैं गाड़ी नहीं लूंगा |

जितेंद्र कहता है – भाई मैं पैसे ऐसे नहीं लूंगा, गाड़ी लेनी पड़ेगी और अभी मुझे आप ₹25000 से ₹30000 तक दे दीजिए | उसके बाद में,  जो भी बात होगी | मैं कल सुबह या दो-तीन दिन में आपसे मिलकर पैसे की डिसकस करता हूं|  भाई से मिलाता हूं और गाड़ी आपके नाम करवा  दूंगा | चलो मैं आपको पास के चाय के खोखे पर मिलता हूं| जितेंद्र पहले से ही गाड़ी को उस खोखे के पास खड़ा करके आया था | आदित्य को लगा कि उसकी बात एक बार सुन लेनी चाहिए हो सकता है उसकी मां की तबीयत सच में ही खराब हो आदित्य तुरंत उस चाय के खोखे पर पहुंचा और जितेंद्र ने आदित्य को गाड़ी दिखाई और पैसे देने की बात कही के पास ₹5000 पहले से ही रखी थी और ₹20000 पास के एटीएम से निकाले और जितेंद्र को दे दिए | जितेंद्र ने गाड़ी को आदित्य के सुपुर्द कर दिया ₹25000 कैश ले लिए |
आदि को क्या पता था कि उसके साथ क्या हो चुका है और बहुत कुछ होना अभी बाकी है | समय उसके साथ कुछ और ही खेल खेल रहा था |

अब उस गाड़ी को वह घर लेकर गया और उसने घरवालों से झूठ बोला कि यह गाड़ी मेरे दोस्त की है| उसने चार-पांच  दिन के लिए मेरे पास रखने के लिए देती है | धीरे-धीरे दिन निकलते गए और चार-पांच दिन से ज्यादा ही हो गए | घरवालों ने उससे पूछा कि भाई यह किसकी गाड़ी है कहां से लेकर आया है जिसकी गाड़ी है उसको देख कर आ| आदित्य ने तो घरवालों से झूठ बोला था और अब आदित्य क्या करता | बेचारा डर गया था | क्योंकि उसने जब से बाइक ली थी उसके अगले ही दिन से ही जितेंद्र ने लाइब्रेरी में आना बंद कर दिया था और आदित्य ने भी उसी दिन से जितेंद्र की खोज करना शुरू कर  दी थी| वह डर गया उसको पता पड़ा जितेंद्र नाम का कोई लड़का है लाइब्रेरी में आता ही नहीं था | उसके मन में बहुत से सवाल आने लगी कहीं यह गाड़ी चोरी की तो नहीं है और अगर यह गाड़ी चोरी की है तो आदित्य क्या करे | उसकी  समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था कि वह अब क्या करे | इधर जितेंद्र भी गायब हो चुका था, और आदि जितेंद्र के चुंगल में पूरी तरीके से फस चुका था |  अगर पुलिस के पास  गाड़ी को लेकर जाता तो हो सकता है गाड़ी के मालिक ने पहले ही गाड़ी चोरी की रिपोर्ट लिखवा कर रखी हो और पुलिस उसी को चोर समझ लेती और उसका साथ ना देती यही सब सोच रहा था |  लेकिन समय को कुछ और ही मंजूर था |

फिर अचानक आदि अपनी मम्मी को लेकर इमरजेंसी में दवा दिलवाने गांव से अलीगढ़ की तरफ गया तो उसी बाइक को लेकर चला गया |  वापस लौटते समय रास्ते में उसकी मौसी का घर पड़ता था | उसकी मम्मी ने बोला कि बेटा मौसी के घरों की मौसी से मिलकर चलते हैं तो आदित्य और उसकी मम्मी उसकी मौसी के घर गए | बाइक को मौसी के घर के बाहर गाड़ी खड़ी करके  मम्मी और आदित्य दोनों अंदर चले गए |  तभी अचानक एटा चुंगी बाईपास पर गाड़ियों की चेकिंग हो रही थी और समय का खेल देखो गाड़ियों की चेकिंग के डर से गाड़ी का मालिक एक अन्य स्कूटी से जिस पर 3 लोग सवार थे हेलमेट भी नहीं था वह उधर उसी गली में से गुजरे जिस गली में आदित्य की बाइक  खड़ी थी | बाइक पर उनकी निगाह पड़ी उन्होंने उस बाइक को पास  से जाकर देखा और पहचाना |  उन्होंने पूरी तसल्ली कर ली कि यह हमारी ही बाइक है उसके बाद पास के थाने में सूचना दी | पास के थाने से 2 पुलिस कांस्टेबल और गाड़ी का मालिक आए | आकर आसपास पूछताछ की और गाड़ी को थाने में उठाकर ले गए तभी आदित्य ने दरवाजा खोला और नीचे देखा गाड़ी नहीं है | फिर वही कांस्टेबल दोबारा से आए और आदित्य से पूछा यहां अभी एक गाड़ी खड़ी थी वह गाड़ी चोरी हो गई है क्या वह गाड़ी तुम्हारी थी | आदित्य ने कहा- हां वह  मेरी गाड़ी थी |

बस क्या जैसे ही उसने इतना बोला पुलिस वाले आदित्य को जबरदस्ती पकड़कर आदित्य को अपनी गाड़ी पर बिठाया और पुलिस थाने ले गए| आदित्य को समझ में नहीं आया कि उसके साथ यह हुआ क्या |

जैसे ही आदि के घरवाले को जब यह बात पता पड़ी आदि को पुलिस पकड़ कर थाने ले गई है तो बहुत परेशान हो गए और जब मामले की छानबीन के बारे में पुलिस कर्मचारियों से जानकारी प्राप्त की तो पता पढ़ाया गाड़ी चोरी की है और यह आदित्य से बरामद हुई है यह सुनकर सभी लोग और ज्यादा परेशान हुए | कोई करता भी तो क्या करता | 

आदित्य को भी  क्या पता था कि उसके साथ यह सब होने वाला है |
पुलिस भी आदि की बात को सुनने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी क्योंकि अब पुलिस की नजर में वही चोर था|

आदि कहता भी तो क्या कहता | उसके पास न तो जितेंद्र का पता मालूम था और नहीं उसके बारे में अधिक जानकारी थी बस उसका नाम मालूम था जितेंद्र | अब इस नाम के सहारे उसको कैसे ढूंढ कर लाया जाए अब अपराधी तो फरार था और पुलिस की नजर में आदित्य ही अपराधी था | चोरी का माल लेना भी तो अपराध की श्रेणी में ही आता है | क्या करें आदित्य तो बुरी तरीके से फंस चुका था | गाड़ी के मालिक ने आदित्य को गौर से देखा उसको पहचाना तो उसको कुछ अलग लग रहा था इसके अलावा गाड़ी के मालिक ने पहले ही अपने क्षेत्र के थाने में चोरी और लूट की रिपोर्ट लिखवा रखी थी और उसने शिनाख्त की कि जिन 4 लोगों ने मुझसे रात 11:00 बजे मारपीट करके मेरे साथ लूट कर ली थी जिसने मेरे डाक्यूमेंट्स मोबाइल और गाड़ी सब छीन लिया था उनमें से यह लड़का नहीं था | एक बार  फिर आदि की तरफ बहुत गौर से  देखा और बोला कि यह लड़का उन चारों में से नहीं था फिर भी पुलिस सुनने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी पुलिस तो एक ही बात पर अड़ी थी | जितेंद्र को पकड़वाओ | नाम पता और मोबाइल नंबर दो हम इस लड़के को छोड़ देंगे | आदित्य के पास कुछ भी नहीं था | आदि लाचार और बेचारा महसूस कर रहा था | वह फस  चुका था,  इन सब बातों  के आधार पर कुछ भी नहीं हो सकता था |  गाड़ी के असली मालिक ने भी पुलिस को यह बोल दिया कि यह लड़का नहीं है | फिर भी क्या करें |  24 घंटे तक पुलिस ने आदि से  पूछताछ की| आदि की समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था| 

आखिर में क्या होना था वही हुआ जो समय करवा रहा था जो समय का खेल चल रहा था जिसमें आदि फस चुका था थाने के इंचार्ज रविंद्र कुमार दुबे ने चालन बनाकर रविवार वाले दिन उसे धारा 414 और 411 के अंतर्गत जेल भिजवा दिया जबकि मामला दूसरे थाने में रेफर किया जाना चाहिए था आदि बुरी तरीके से फंस चुका था..

अब क्या करें पुलिस ने शायद अपना फर्ज निभाया लेकिन पुलिस ने एक परसेंट यह नहीं सोचा कि यह मध्यम परिवार का बच्चा है और पूरे भारतवर्ष की इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा है और यूपीएससी की तैयारी कर रहा है | अब तो आदि पर एक फ्रॉड का लेबल लग चुका था जबकि गाड़ी का असली मालिक कोई भी कार्यवाही करवाने के लिए तैयार नहीं था | उसने उसकी शिनाख्त की कि यह लड़का नहीं था | फिर भी..,
कहीं ना कहीं उत्तर प्रदेश पुलिस को तो सिर्फ नाम कमाने की आदत हो चुकी थी | अखबार में फोटो आने की आदत हो गई थी | शायद इसीलिए उनको , जो हो रहा था वह दिखाई नहीं दे रहा था और उन्होंने जानने की कोशिश भी नहीं की | सिर्फ उसको पूरी तरीके से चोर साबित करने में लगे थे |  बेचारा आदि करता भी तो क्या करता ? आदि के पास अपने आप को बेगुनाह साबित करने के कोई भी सबूत नहीं थे |

पुलिस ने तो ऑपरेशन प्रहार के तहत उसे शातिर अभियुक्त का करार दे दिया था |
कहीं ना कहीं आदि की भी कमी थी |आदि जेल चला गया|

यह कहते हुए अटकते शब्दों में अचानक मनीषा जोर-जोर से रोने लगी | क्योंकि आदि कोई और नहीं मनीषा का सगा भाई था |

यह कहते हुए मनीषा की जीभ लड़खड़ा गई |

तभी पास में बैठा मयंक जिसने आज ही चोरी का मोबाइल किसी से खरीदा था अचानक उठा और सभी से बोलता है |  मनीषा के भाई की कहानी सुनकर मुझसे भी एक गलती हो गई है | मैंने चोरी का मोबाइल खरीद लिया है अब मैं क्या करूं |  तभी पास बैठे सभी दोस्तों ने समझाया इस मोबाइल को मुंबई पुलिस के हवाले कर दो और कहा यह उत्तर प्रदेश पुलिस नहीं जो आपकी बात को नहीं सुनेगी और सुनकर अनजान बन जाएगी या फिर अपने फर्ज का हवाला देकर सिर्फ लीपापोती करेगी या फिर अपनी मनमानी करेगी | मयंक की समझ में आया और तुरंत उसने पास के थाना इंचार्ज को कॉल लगाया वहां जाकर उस मोबाइल को पुलिस के पास जमा कर दिया और अपने साथ मोबाइल को लेकर घटित हुई सारी घटना बताइ|

तो दोस्तों इस घटना से हमें यह सीख मिलती है कि चोरी का मोबाइल , चोरी की गाड़ियां इत्यादि या  सेकंड हैंड कोई भी चीज PURCHASE करने से पहले उसको पूरी तरीके से जांच पड़ताल कर लें पूरी तरीके से यह  सुनिश्चित करने के बाद ही कोई सामान किसी अन्य व्यक्ति से लें और अनजान व्यक्तियों से तो बिल्कुल ही सावधान रहें क्योंकि इस तरीके का फ्रॉड किसी के भी साथ हो सकता है |

यह कहानी देश में जागरूकता के माध्यम से एक सच्ची घटना पर आधारित है |

यह नहीं कह सकते कि आदित्य उर्फ आदि गलत था या उत्तर प्रदेश पुलिस |

बस कह सकते हैं ..कमी दोनों तरफ से हुई थी |आखिरकार आदि के साथ क्या हुआ ? मामला कोर्ट तक जा चुका था अब फैसला कोर्ट से ही होना बाकी था| कोर्ट का मामला कोर्ट ने सभी दलीलें सुनने के बाद सही फैसला ही किया होगा क्योंकि हमारे भारत देश पर और उसके संविधान पर इतना तो भरोसा है …

कहावत कही जाती है शराब के ठेके पर खड़े होने वाला व्यक्ति भले ही पीने वाला हो या ना हो अगर शराब के ठेके पर खड़ा है तो शराबी ही माना जाएगा

सावधान रहें सचेत रहें

WRITER:- Himank Bhardwaz