Aakar Mil

दुश्मन से.. कहता हूं.. आकर मिल…

तू है.. गहरा समंदर.., मैं हूं.. साहिल..

तू साजिशों का…खतरा.., बेमिसाल है…

तुझे.. खुद, तेरी.. रूह से, सवाल है..

खामोशी…के चंद स्वरों से.., टूट गया..

तबाही..है बाकी.. अभी.., मुर्गा हलाल है…

मैं…दर्द से, बिखरा हूं..  फिर भी.., कातिल…

दुश्मन से… कहता हूं..आकर, मिल…

तू.. पहरा,बवंडर सा… है.. जालिम…

तू…जख्म पर… चिंगारी है…

तूफान.. लाकर.. क्या? दिखाना.. चाहता है..

ये…एक बूंद…तुझ पर.. भारी है..

मैं…अश्क का.. कतरा हूं.. तेरी मुश्किल..

दुश्मन.. से..कहता हूं…आकर, मिल…

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Himank Bhardwaz