Kyoon Ki Mein Meetha Sa Ahsaas Hoon

मुझे आंखों से सब कुछ कहना आता है,
मुझे ख़्वाबों को हक़ीक़त करना आता है,
अब तुम्हें मेरी चमकीली आंखों से शिकायत है,
अब तुम्हें मेरे मुमकिन ख़्वाबों से शिकायत है,
मुझे फिर भी तेरी सांसों में उतरना आता है,
मुझे फिर भी तेरे गालों को छूना आता है,
क्योंकि मैं मीठा सा एहसास हूं मुझे जीना आता है,
क्योंकि मैं तेरे होठों की तड़पी प्यास हूं मुझे ज़हर पीना आता है,
क्योंकि मैं तड़पी तड़पी आस हूं मुझे तड़पना आता है,
क्योंकि मैं गुजरता अल्फाज हूं मुझे संवरना आता है,
क्योंकि मैं सिर्फ दिल के पास हूं मुझे धड़कना आता है,
क्योंकि मैं मीठा सा एहसास हूं मुझे जीना आता है, — Himank Bhardwaz