KOSHISH

Koshish

छोटी सी कोशिश है…..आसमान को छूने की,
दरिया में समुंदर के किनारों को…. डुबोने की,
हमने भी रख दी है…..सारी ज़िन्दगी दांव पर,
देखना है..क्या कीमत होगी? ख़ुद को संजोने की,

Himank Bhardwaz