Dil Jalaa Hai

Dil Jalaa Hai

ज़िंदगी अब, भरोसे के क़ाबिल नहीं है.. मौत का आईना देखता हूं,
दिल जला है.. मेरा इस कदर भी, तख्तियों पे तमाशा बना हूं,

रोज़ होती है बातें मगर, सिलसिला ये ख़त्म ना हुआ,
क़ाफ़िले मिट गए.. गर्दिशों में, तल्खियों ने संभाला हुआ हूं,

दिल जला है.. मेरा इस कदर भी, तख्तियों पे तमाशा बना हूं,

Himank Bhardwaz